SHAYARI 23

क्या लिखूं क्या ना लिखूं
के बीच जब जब फस जाता हूँ मैं,
तब तब तेरे एक ख्याल से ही
कुछ हर्फे लिख लेता हूँ मैं;
दिल तो पासबान है तेरी यादों का
कई अच्छे-बुरे लम्हें छुपाएं हुए,
हर अल्फ़ाज़ को सजीव कर देता हूँ मैं
तेरी यादों से रूहानियत भरते हुए।

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