Shayari 14

कई चपेटे खाकर निकलती है शायरी
जितना ज़्यादा दर्द उतनी निखरती है शायरी
आप जो वाह वाह करके ग़ालिब कह रहें हैं
आप ही से शुरू आप ही पे ख़त्म होती है शायरी

Comments